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The constitution of India - part 10

The constitution of India

The constitution of India
The constitution of India

राज्यपाल


राज्यपाल के लिए अनुच्छेद 153 के तहत जोगवाई है। राज्यपाल राज्य के संविधानिय वडा और राज्य के प्रमुख होते है। राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रतिनिधि होते है। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा होती है और शपथ विधि वडी अदालत के न्यायादिश द्वारा दिलाई जाती है। राज्यपाल का इस्तीफा राष्ट्रपति को जाता है। उम्र 35 साल की और जब तक राष्ट्रपति चाहे तब तक वह काम कर सकते है। राज्य के सारे काम राज्यपाल के नाम पर होते है। सामान्य रूप से राज्य के बाहर के व्यक्ति को ही राज्यपाल बनाया जाता है। कोई एक व्यक्ति एक से ज़्यादा राज्य के राज्यपाल बन सकते है। राज्य7 राज्य की तमाम यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति गिने जाते हैं। राज्यपाल कुलपति और उप कुलपति की नियुक्ति करने की सत्ता रखते है। केंद्रसरकार के राज्य में प्रतिनिधि कहा जाता है। 

राज्यपाल की सत्ता


कारोबारी सत्ता

कारोबारी कार्य राज्यपाल के नाम पर होते है.राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति और सपथ विधि भी करवाते है उसके साथ ही वह एडवोकेट जनरल, राज्य चुनाव कमिश्नर राज्य सेवा अर्पण अध्यक्ष, और विधान सभा में अग्लो इंडियन सभ्य की नियुक्ति करते है. राज्यपाल राष्ट्रपति शासन को जारी करने के लिए राष्ट्रपति को विनंती करते है. विधान परिषद् हो ऐसे राज्य में ⅙ सभ्यों की नियुक्ति कला साहित्य समाज सेवा जैसे क्षेत्र मेसे विधान परिषद् में कर सकते है. 

धाराकीय सत्ता 

अनुच्छेद - 168 के तहत राज्यपाल राज्य विधान सभा का अभिन्न अंग है. वह विधान सभा का शत्र बुलवा सकते है. विधान सभा के प्रत्येक वर्ष में प्रथम सत्र तथा चुवान के बाद संबोधन कर सकते है. विधान सभा में पसार हुए खरडा को मंजूरी दे सकते है. राज्य के नाणापंच cag राज्य के जाहेर सेवा आयोग जैसे अहवाल विधान सभा के समक्ष पेश करते है. कोई भी खरडा राष्ट्रपति को भेज सकते है या तो खुद के पास रख सकते है.

न्यायिक सत्ता

वडी अदालत के साथ चर्चा विचारणा के बाद जिल्ला के जज की नियुक्ति बदली जैसे कार्य कर सकते है. मृत्यु दंड के सिवाय किसी भी सजा को कम कर सकते है यातो उसको मौकूफ भी कर सकते है.

नाणाकिय सत्ता

विधान सभा में नाणा बिल राज्यपाल की मंजूरी से पेश किया जाता है. हर पांच वर्ष में नाणापंच की नियुक्ति करते है. राज्य की संचित निधि मेसे नाणा बहार निकालना और पेश किया गया खरडा राज्यपाल की मजूरी के बाद ही पसार होता है. 

नोंध - दिल्ली, पोंडिचेरी, अंदमान निकोबार में राज्यपाल के बदले उपराज्यपाल का पद होता है. जब की चंडीगढ़, दिव, दमन, दादरा, और नगर हवेली जैसे स्थान पर वहीवटदार का पद होता है. पंजाब के राज्यपाल चंडीगढ़ के वहीवटदार के रुपमे गिने जाते है.

मुख्य मंत्री


अनुच्छेद 164 को लेकर जोगवाई. मुख्यमत्री की नियुक्ति और सपथविधि राज्यपाल करते है. और उनका इस्तीफा भी वही लेते है. मुख्यमंत्री को राज्य के राजकीय वडा भी कहा जाता है. मुख्यमंत्री राज्यपाल और मंत्रिमंडल के बिचमे एक कड़ी की तरह है. विधान सभा में सरकारी निति की जाहेरात करते है. मुख्यंत्री राज्य योजना बैठक के अध्यक्ष होते है. आंतर राज्य परिषद् तथा राष्ट्रीय विकास परिषद् के सभ्य भी होते है. 

राज्यस्तर का मंत्री मंडल

अनुच्छेद 163 के तहत जोगवाई होती है. अनुच्छेद 164 के तहत केंद्रीय मंत्रिमंडल के तहत तीन प्रकार के मंत्रियो का समावेश होता है. किन्तु राष्ट्रपति की जहग पर राज्यपाल होते है.

1 केबिनेट मंत्री
2 राज्यमंत्री
3 उपमंत्री

मंत्रिमंडल के सभ्य संख्या की बात करे तो विधान सभा की कुल बैठक में महत्तम 15% से ज्यादा नहीं और कम से कम 12 सभ्य मुख्यमंत्री के साथ.

राज्य का विधान मंडल

राज्य का विधान मंडल राज्यपाल, विधान परिषद् और विधान सभा को मिलाकर बनता है. भारत में सभी राज्य द्विगृही नहीं होते है. भारत के इन 7 राज्यों में ही विधान परिषद् की जोगवाई है.

1 जम्मू और कश्मीर
2 उत्तरप्रदेश
3 कर्णाटक
4 बिहार
5 महाराष्ट्र
6 आँध्रप्रदेश
7 तेलंगाना

विधान परिषद्


अनुच्छेद 171 के तहत जोगवाई है. इसमें राज्य का उपरी गृह और राज्य का दृतीय गृह होता है. विधान परिषद् की सभ्य संख्या ⅓ से ज्यादा नहीं हो सकती . और कम से कम 40 सभ्य होने चाहिए. सभ्य संख्या को लेकर जम्मू कश्मीर में एक अपवाद भी मौजूद है क्योकि वहा 36 सभ्य ही है.

विधान परिषद् के सभ्यों का चुनाव

⅓ सभ्यों विधान सभा के सभ्यों द्वारा चुने जाते है. ⅓ सभ्यों का चुनाव स्थानिक स्वराज्य की सभा के द्वारा होता है. ⅙ सभ्यों का चुनाव राज्यपाल के द्वारा होता है. 1/12 सभ्यों का चुनाव स्नातक मतदार मंडल के द्वारा होता है. जिन्होंने 3 साल पहले स्नातक की पदवी ली होती है. 1/12 सभ्यों का चुनाव शिक्षक मतदान मंडल के द्वारा होती है जोकि कम से कम 3 साल तक माद्यमिक या उच्च शिक्षण के साथ सम्बंधित हो. सभ्य की उम्र 30 साल की होती है और उनकी मुद्दत 6 साल तक होती है. हर 2 साल में ⅓ सभ्योकी निवृति होती है. कोरम कुल संख्या के 1/10 या तो 10 सभ्य 2 मेसे जो भी ज्यादा हो वह गिना जाता है. सभ्यों खुद मेसे ही सभापति और उपसभा पति का चुनाव करते है. विधान परिषद् वाले राज्यों की सभ्य संख्या.

1 उत्तरप्रदेश - 99
2 बिहार - 75
3 महाराष्ट्र - 78
4 कर्णाटक - 75
5 आंध्रप्रदेश - 50
6 तेलंगाना - 40 

विधान परिषद का सर्जन या अंत लाने के लिए विधान सभा के कुल सभ्यो का पूर्ण बहुमत या हाजर मतदान कर रहे सभ्यो का ⅔ बहुमति से प्रस्ताव पसार करके संसद में भेजा जाता है। संसद मान्यता बहुमति से पसार की जाती है। राष्ट्रपति इस मुद्दे का जाहेर नामा जारी करते है। 

विधान सभा


अनुच्छेद 170 के तहत जोगवाई। इसमें राज्य का निचे का गृह1 और राज्य का प्रथम गृह शामिल हैं। विधान सभा मे कम से कम संख्या - 60 और ज़्यादा से ज़्यादा संख्या - 500 होती है। सबसे ज़्यादा संख्या उत्तरप्रदेश में है जोकि - 403 है। सबसे कम संख्या - 32 है जोकि सिक्किम में है इसके अलावा गोवा में - 40 और मिज़ोरम में भी - 40 है। गुजरात मे विधान सभा की संख्या - 182 है। गुजरात मे विधान सभा की प्रथम बैठक कच्छ के अबडासा में हुई थी। अनुच्छेद - 333 के तहत राज्यपाल 1 एंग्लोइंडियन सभ्य की नियुक्ति कर सकते1 है। विधान सभा मे उम्र 25 साल तक होनी चाहिए और विधान सभा की मुद्दत 5 साल की होती है और सभ्यो कि मुद्दत भी 5 साल की होती है। सभ्यो खुद मेसे ही स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति करेगी। नाणाबिल सिर्फ विधान सभा मे ही मंज़ूर होता है। गुजरात के पहले विधान सभा के सभ्य संख्या 132 थी। 1975 में 5 वी विधान सभा की सभ्य संख्या 182 तय की गई थी। किसी भी आपातकालीन स्थिति में विधान सभा का कार्यकाल संसद 1 साल और उसके बाद 6 माह यही डेढ़ साल ज़्यादा कर करती है। 7 केंद्रशासित प्रदेश मेसे 2 केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली और पॉन्डिचेरी में विधान सभा कार्यरत है। 

राज्यस्तरीय सैयुक्त बैठक

राज्यस्तर पर सैयुक्त बैठक नही बुलाई जा सकती है। राज्य स्तर पर विधान परिषद सामान्य खारडा को ज़्यादा से ज़्यादा 4 महीने तक खुदके पास रख सकते है। विधान परिषद कोई निर्णय ना दे तो वह खारडा पसार हुआ माना जाता है। 

राज्य के एडवोकेट जनरल

अनुच्छेद 165 के तहत जोगवाई। राज्य के एडवोकेट जनरल की नियुक्ति और उनका इस्तीफा राज्यपाल कराते है। उनका कार्यकाल 62 साल की उम्र तक और राज्यपाल जब तक चाहे टैब तक होता है। उनको राज्य के कैबिनेट मंत्री जैसा दर्ज़ा प्राप्त होता है।राज्यसरकार के कानूनी सलाहकार गिने जाते है। अनुच्छेद 177 के तहत राज्य के दोनों गृह की प्रक्रिया में भाग लेके बोलनेका अधिकार प्राप्त होता है। किंतु मत दान में भाग नही ले सकते। इनका मुख्य कार्य राज्यसरकार को कायदा विषयक कार्य मे सलाह देना है। लायकात - इनकी लायकात भी हाई कोर्ट के न्यायाधीश जैसी ही होती है। 10 साल न्यायाधीश का अनुभव हाई कोर्ट में और 10 साल के वाक़िलात का अनुभव। हाल के एडवोकेट जनरल - श्री कमल त्रिवेदी है।

संविधानिय संस्था


चुनाव पंच


अनुच्छेद - 324 के तहत जोगवाई। चुनाव पंच की रचना राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है।अभी के चुनाव कमिशनर सुनील अरोरा है और प्रथम चुनाव कमिशनर सुकुमार सेन थे. चुनाव पंच में एक मुख्या चुनाव कमिशनर और 2 अन्य चुनाव कमिशनर होते है. 15 अक्टूबर 1950 तक एक ही चुनाव कमिशनर थे. इनका कार्य काल 6 साल तक या तो 65 की उम्र तक होता है. इनका इस्तीफा राष्ट्रपति लेते है. मुख्य कमिशनर को पद पर से हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया करनी पड़ती है. अगर कार्य की बात की जाए तो इनका कार्य राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सांसद, और धारासभ्य के चुनाव कराना है. चुनाव या आचारसंहिता का अमल करवाना मतदान यादी को तैयार करना मतक्षेत्र को नक्की करना राजकीय दलों को मान्यता और उनके चिन्ह को बाटना है. शुरुआत में मत देने का अधिकार 21 साल की उम्र में दिया जाता था लेकिन सन 1989 में संविधान के 61 वे सुद्धार के तहत यह 21 साल से घटा कर 18 साल किया गया।

राज्य चुनाव पंच

राज्य चुनाव पंच की रचना राज्यपाल के द्वारा होती है. मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति राज्य सरकार की सलाह से होती है. हर एक डिस्ट्रिक्ट में कलेक्टर चुनाव अधिकारी के तौरपर काम करते है. वर्तमान में गुजरात राज्य के चुनाव कलेक्टर के तौर पर डॉ वरेश सिन्हा कार्यरत है. EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से यातो मतदान में जिसने भी मत दिए है उनकी रसीद निकलती है इसका 2013 की नागालेंड विधान सभा के चुनाव में उपयोग हुआ था. इस मशीन का सबसे पहला उपयोग 12 वि लोकसभा में 1998 से दिनेश गोस्वामी की विनंती से किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2013 की सुनवाई के तहत संसद के धारासभ्य के तौरपर स्थित किसी भी सभ्य को किसी भी गुनाह के लिए 2 या उससे ज्यादा सालो की सजा हो टी उस व्यक्ति का सभ्यपद रद हुआ माना जाएगा और जो व्यक्ति जेल में हो या तो कस्टडी में हो वैसे व्यक्ति को चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध होता है.

2 संघ जाहेर सेवा आयोग

UPSC - यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन में अनुच्छेद 315 से लेकर 323 तक की जोगवाई है. UPSC के सभ्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते है. इस संस्था में सभ्य संख्या 9 से लेकर 11 तक होती है. इसमें कार्यकाल का समय 6 साल या 65 साल तक होता है. राष्ट्रपति सभ्य या अध्यक्ष को दूर कर सकते है. इस संस्था का कार्य अखिल भारतीय सेवाओ और केंद्रीय सेवाओ की परीक्षा का आयोजन करना और भरती करने का होता है.

3 राज्य जाहेर सेवा आयोग

GPSC - गुजरात पब्लिक सर्विस कमीशन अनुच्छेद 315 के तहत जोगवाई. यह आयोग राज्य की भरती संस्था के रूप में भी जाना जाता है. इनके अध्यक्ष और सभ्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते है. किन्तु राज्यपाल उनको उनके पद परसे हटा नहीं सकते है. इस आयोग में कार्यकाल 6 साल या 62 साल की उम्र तक होता है. अगर किसी भी व्यक्ति को इस आयोग के साथ जुड़ना है तो उसके पास कम से कम 10 साल का केंद्र के राज्य सरकार का अनुभव होना चाहिए. अध्यक्ष और सभ्य का वेतन और पेन्शन राज्य के संचित फंड मेसे आता है.

4 नाणा पंच

अनुच्छेद 280 के तहत जोगवाई होती है. इसकी रचना राष्ट्रपति के द्वारा होती है इसमें अध्यक्ष के सहित 5 व्यक्ति होते है जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा होती है. राज्य नाणापंच की रचना अनुच्छेद 243 (1) के तहत राज्यपाल के द्वारा होती है. इनका कार्य केंद्र और राज्य के बिच में पैसे बांटना और अन्य नाणा किया मुद्दे पर समीक्षा करना. इस आयोग की राष्ट्रपति के द्वारा हर 5 साल में रचना होती है. अनुच्छेद 275 के तहत राज्य सरकार को दी जाने वाली ग्रांट को नक्की करने में इन की सलाह ली जाती है. राज्य को दिया जानेवाला अनुदान के सिधांत को तय करते है. इस आयोग का ध्यक्ष जाहेर बाबत का अनुभवी होना चाहिए. सभ्यों हाई कोर्ट के निवृत न्यायाधीश या उनके समकक्ष होना चाहिए. अभी तक कुल 14 नाणा पंच की रचना हुई है. प्रथम नाणा पंच 1951 में जिनके अध्यक्ष के सी नियोगी थे. वर्त्तमान में 15 वा नाणापंच चालू है जिनके अध्यक्ष एन के सिंघ है.

5 राष्ट्रीय पछात वर्ग पंच (OBC)

अनुच्छेद 340 के तहत जोगवाई। इसमें अध्यक्ष के सहित 5 सभ्य होते है। इस के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के निवृत न्यायाधीश होते है। दूसरे 4 सभ्यो जिसमे से 2 सभ्यो के पास पिछड़े वर्ग को संबंधित ज्ञान होता है और एक समाज शास्त्री और एक सभ्य मंत्री स्तर जा अधिकारी होता है। अध्यक्ष और सभ्यो की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा होती है। अगर इनके कार्य के बारेमे बात की जाए तो सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े हुए वर्ग की स्थिति को सुधारना है। कोई भी समूह के द्वारा इस वर्ग में समाविष्ट होनेकी मांग की परिस्थि की समस्या को सुलजाना और अगर योग्य हो तो केंद्र सरकार को सलाह देना।

6 राष्ट्रीय अनुसूचित जाति पंच

अनुच्छेद 338 के तहत जोगवाई। एक अध्यक्ष एक उप अध्यक्ष और एक सभ्य ऐसे तीन सभ्यो की नियुक्ति राष्ट्रपति करते है। कार्यकाल के विषय को लेकर सारे निर्णय राष्ट्रपति करते है। अगर कार्य की बात करे तो इस तरह के वर्ग की जातीओ के लिए होनेवाले कार्य मे अहेवाल राष्ट्रपति के समक्ष पेश करना। यह पंच 2004 से अलग किया गया है। 65 वे संविधानिय सुधार 1990 से अनुसूचित जाति और जनजाति के रक्षण के लिए एक पंच की रचना हुई थी। 89 वे संविधानिय सुधार 2003 के तहत अनुसूचित जाति एवं जनजाति दिनों के लिए अलग अलग पंच की रचना हुई।

7 राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

अनुच्छेद 338 A के तहत जोगवाई। इसमें तीन सभ्य होते है जिसमे एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष होते है। इन सभी सभ्यो की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा होती है। 2004 से स्वतंत्र रचना। इनका कार्य देश की अनुसूचित जनजातियों के हितों का रक्षण करना और उनके लिए होने वाले कार्यो का मूल्यांकन करना है।

बिन वैधिक संस्था (मंत्री मंडल की मंजूरी से बनाई गई संस्था)

1 आयोजन पंच

वर्ष 1946 में के सी नियोगी ने अध्यक्षता में बनी समिति की विनंती की थी। 15 मार्च 1950 के दिन आयोजन पंच अमल में आया था। इसके अध्यक्ष वडाप्रधान होते है। आयोजन पंच के प्रथम अध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू और उपाध्यक्ष गुलज़ारी लाल नंदा थे। इस आयोग के अंतिम अध्यक्ष नरेंद्र मोदी और उपाध्यक्ष मोन्टेकसिंघ आहलुवालिया है। प्रथम महिला अध्यक्ष - इन्दिरा गांधी थी। वह बिन संविधानिय संस्था है। एक सलाहकारी बोडी है। कार्य देशके संधानो को संतुलित उपयोग हो सके ऐसी असरकारक योजना को बनाना। पंच वर्षीय योजना का मुशदा तैयार करके केंद्रीय मंत्री मंडल के समक्ष पेश करना।

सॉलिसिटर जनरल

भारत सरकार के कानूनी अधिकारी के सहायक। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है।

राज्य भाषा


संविधान भाग - 17। अनुच्छेद 343 के तहत। संघ की राज्यभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है। संविधान के शुरुआत से लेकर प्रथम 15 साल तक सरकारी कार्य मे अंग्रेज़ी भाषा का उपयोग करने का निर्णय लिया गया। 1963 में संसद में राज्यसभा अधिनियम पसार कर के नक्की किया गया के अंग्रेज़ी भाषा का उपयोग अनिश्चित काल तक ही चालू रहेगा। अनुच्छेद 344 के तहत राष्ट्रपति राज्य भाषा को लेकर कितने विषयो पर सलाह देने के लिए एक आयोग की रचना कर सकते है। 1955 में बी जी खेर की अध्यक्षता में प्रथम राज्यसभा को लेकर थोड़े विषयो के बारे में सलाह देने के लिए एक आयोग की रचना की गई है जिसमे भाषा के विकास के लिए कार्यरत होंगे। संविधान में 8 वी अनुसूचि में भाषा का समावेश किया गया है। मूल संविधान की 8 वी अनुसूचि में 14 भाषाए थी और अभी 22 भाषाए है जिसमे इंग्लिश और राजस्थानी भाषा समाविष्ट नही है। यह भाष नीचे दी गयी है।

1 गुजराती
2 असमिया
3 बंगाडी
4 कन्नड
5 हिंदी
6 काश्मीरी
7 मलयालम
8 मराठी
9 उड़िया
10 पंजाबी
11 संस्कृत
12 तमिल
13 तेलुगु
14 उर्दू
15 सिंधी
16 नेपाड़ी
17 कोंकणी
18 मणिपुरी
19 मैथिली
20 बोडो
21 डोंगरी
22 संथाली

21 वा संविधानिय सुधार 1967 को हुआ था जिसमे सिंधी भाषा भी शामिल हुई थी। 71 वा संविधानिय सुधार 2003 में मैथिल, बोडो, डोंगरी और संथाली भाषा शामिल हुई थी। अभी कुल मिलाकर 22 भाषा थी।

पंचायती राज्य स्थानिक स्वराज

स्थानिक प्रश्नों के निराकरण के लिए पांच इंसान की संस्था। अनुच्छेद 40 के तहत पंचायत के स्थापना की जोगवाई। साल 1992 में 73 वे संविधानिय सुधार के द्वारा भाग - 9 अनुच्छेद 243 अंतर्गत पंचायती राज को संविधानिय मान्यता प्राप्त हुई थी।

इतिहास

महाभारत के शांति वर्ष में भी ग्राम का उल्लेख है। वर्ष 1882 में लार्ड रिपने खारडा के द्वारा स्थानिक संस्था के सिद्धांत नक्की किये। जिसके कारण वह स्थानिक स्वराज्य की संस्थाओके पिता कहलाते है। 1907 में निर्मित रॉयल कमीशन ने स्थानिक संस्थाओ के कार्यक्षेत्र के विकेंद्रीकरण के मुद्देपर विस्तृत बिनती की थी। 1952 में सामुदायिक विकास कार्यक्रम शुरू किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक उत्पादन और आर्थिक नियोजन का है।

बलवंतराय महेता समिति

सामुदायिक विकास कार्यक्रम कि असफलता के बाद उनके कार्य की समीक्षा करने के लिए बलवंतराय महेता की अध्यक्षता में ग्रामोद्वार समिति की स्थापना हुई थी. इस समिति के द्वारा तीन स्तरीय पंचायती व्यवस्था की बिनती हुई थी.

1 ग्राम पंचायत
2 तालुका पंचायत 
3 जिल्ला पंचायत

इस बिनती का स्वीकार 1 अप्रैल 1958 को हुआ जिसके परिणाम स्वरुप भारत में 2 अक्टूबर 1959 के दिन राजस्थान के नागौर जिल्ले में वादाप्रधन नहेरु के हाथो पहेली पंचायत राज्य का आरंभ किया गया. इसी साल आँध्रप्रदेश में पंचायती राज की स्थापना हुई. 1 अप्रैल 1963 के दिन गुजरात में भी पंचायती राज की शुरुआत हुई.

अशोक महेता समिति 1977

इस समिति के द्वारा दृतीय राज की बिनती हुई जिका अस्वीकार हुआ. इसके आलावा और तीन समिति के द्वारा भी द्विस्तरीय पंचायती बिनती की गयी थी.

1 1984 में सी एच हनुमंत राय समिति
2 1985 में जी वि के राय समिति
3 1986 में लक्ष्मीमल सिंधव समिति

सन 1984 में राजिवगांधी की सरकार ने पंचायती राज की अपर्याप्तता को दूर करने के लिए 84 व संसोधन अधिनियम दाखिल किया. 1992 में 73 वा संविधानिय सुधार के द्वारा पंचायती राज संस्था ओ को संविधानिय मान्यता दी गयी जिसके तहत 11 वि अनुसूची को लाया गया और उसमे 29 विषय रखे गए. 24 अप्रैल 1993 के दिन उसका अमल हुआ. 24 अप्रैल पंचायती राज दिन. महिलाओ को 30% अनामत की सुविधा भी दी गयी. पंचायती राज का कार्यकाल 5 साल का होता है अगर उससे पहले विसर्जन होता है तो 6 महीने में चुनाव करना आवश्यक है. इसके चुनाव राज्यचुनावपंच के द्वारा होते है. राज्य सरकार द्वारा पंचायत को जरुरी पैसे देने के लिए नाणापंच की जोगवाई होती है. ग्रामपंचायत के अंतर्गत ग्राम सभा सालमे कमसे कम 2 बार मिलनी चाहिए। तालुका पंचायत के सभ्यो को केलिगेट्स के नाम से जाना जाता है।

नगरीय शाशन

नगरीय शासन सबसे पहले 1688 में ब्रिटिश शासन के द्वारा शहर के लिए नगर निगम संस्था की स्थापना हुई। साल 1793 के चार्टर्ड एक्ट के द्वारा मद्रास, कोलकाता, और मुम्बई के लिए नगर निगम की स्थापना हुई थी। साल 1992 के 14 वे सुद्धार के अंतर्गत संसद ने नगरपालिका को संविधानिय मान्यता दी जिसके अंतर्गत 18 विषय को जोड़ा गया। जिसकी जोगवाई संविधान - संविधान - भाग - 9 (A) अनुच्छेद 243P से 243 2G में है। मुद्दत 5 साल है। नाणाकिय सहाय के लिए राज्य नाणापंच मेसे नगरपालिका के सभ्यो को काउंसिल और महानगरपालिका के सभ्यो को कॉरपोरेट कहाजाता है। नगरपालिका के वडा को प्रमुख और महानगरपालिका के वडा को मेयर कहा जाता है। गुजरात मे 159 नगरपालिका और 8 महानगरपालिका है।

जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा

संविधान के भाग 21 में अनुच्छेक 370 के तहत जम्मू और कश्मीर राज्यो को विशेष दर्जा दिया गया है। इस कलम की रचना एन जी आयंगर के द्वारा हुई है। प्रथम अनुसूचित में समाविष्ट 15 वा राज्य है। 26 अक्टूबर 1947 के दिन वहा के महाराज हरि सिंह और जवाहरलाल नेहरू के बीच जम्मू अयर कश्मीर का भारत मे विलय पत्र में हस्ताक्षर हुए थे। इस विलय पत्र की जोगवाई के तहत ही अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा दिया गया था। उनके विधान सभा की मंजूरी के बिना अनुचेक्स 370 नाबूद नही किया जा सकता। वहा मिलकत का अधिकार आज भी वही है। वहां की राज्यसभा उर्दू है पर सरकारी कामकाज के लिए अंग्रेज़ी भाषा का उप्योग किया जाता है। 26 जनुअरी 1957 के दिन जम्मू और कश्मीर का अलग संविधान अस्तित्व में आया। उनकी विधानसभा की मंजूरी के बिना केंद्र सरकार सैयुक्त यदि की विषय पर कायदा नही बना सकती और कटोकटी भी लागू नही कर सकती। राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा 5 वर्ष के लिए होती है। उनकी विधान सभा का कार्यकाल 6 साल का है।

महत्व के ऑपरेशन


1 ऑपरेशन केतु

तह ऑपरेशन ब्लैक मनी के दुरुपयोग को घटाने के लिए हुआ था। और इसकी 1986 में नाणामंत्री के द्वारा रचना हुई थी।

2 ऑपरेशन कालभैरव

नशीले और मादक पदार्थ के प्रचार प्रसार को रोकने के लिए।

3 ग्रीन स्टार

चंबल नामक डाकू को रोकने के लिए।

4 ग्रीन बोर्ड

वांसतु उत्पादन को बढ़ाने के लिए।

5 ऑपरेशन ब्लूस्टार

3 जून 1984 के रोज़ अमृतसर में सुवर्णमन्दिर में आतंकवादी का सामना करनेके लिए।

6 ऑपरेशन मिड नाईट

18 जनवरी 1987 के रोज़ सुवर्णमन्दिर के आतंकवादी को पकडनेकी कार्यवाही के लिए।

7 ऑपरेशन ब्लड थंडर

18 मई 1988 के दिन सुवर्णमन्दिर को फिरसे आतंकवादी ओ से मुक्त करवाने के लिए।

8  फलट लाइट

देशमें 100% साक्षरता लानेके लिए।

9 फेथ ऑपरेशन

1984 में भोपाल में हुई गेस दुर्घटना को काबू में लाने के लिए।

10 गृह हॉप ऑपरेशन

उत्तराखंड में आये हुए पुर ते समय शुरू किया गया था।

11 मैत्री ऑपरेशन

नेपाल में हुए प्रलय के समय किया गया ऑपरेशन

12 ऑपरेशन ज़ीरो पावर

1942 में हिन्द छोड़ो आंदोलन के समय अंग्रेज सरकार के द्वारा कियागया ऑपरेशन

13 ऑपरेशन पोलो

हैदराबाद को भारत के साथ जुड़ने के लिए किया गया ऑपरेशन

महत्व की समिति


1 सतीशचंद्र समिति

सिविल सर्विस की परीक्षा में सुद्धार करने हेतु।

2 वांचू समिति

प्रत्यक्ष कर संबंधित समिति।

3 महालकाबीस समिति

राष्ट्रीय आयत के साथ संबंध है.

4 स्वामीनाथन समिति

वस्ति निति के साथ संबंध

5 तिवारी समिति

औद्योगिक मंदी के निवारण की लिए

6 नर्सिहम समिति

बेंक क्षेत्र के साथ सम्बंधित

7 दिनेश गौस्वामी समिति

चुनाव के मुद्देपर संबंधित

8 राजा चलैया समिति

कर में सुधार करने के लिए

9 जानकी रामन समिति

 शेर बाज़ार के कौभांड को पकड़ने के लिए.

10  व्होरा समिति

मुंबई के अंदर हुए विस्फोट की जाँच से संबंधित समिति

11 अरुण घोष समिति

साक्षरता अभ्याँ के लिए

12 शिव रामन समिति
नाबार्ड बेंक की स्थापना से संबंधित

13 स्वर्णसिंध समिति

मुलभुत फ़र्ज़ समिति

14 तेज बहादुर सप्रू समिति

राजनीति के मार्गदर्शन सिद्धांत इस समिति की बिनती से संविधान में समाविस्ट हुआ.

केंद्र और राज्य के संबंध को लेकर बनिहुई समिति


1 सेतलवाड समिति

संविधान में सुधार पर राज्य को स्वतंत्रता

2 राजामन्नाड समिति

आंतर राज्य परिषद् की रचना

3 सरकारिया आयोग

आंतर राज्य परिषद् की रचना

4 मद्मोहन के बाद समिति

लश्करी दलों के मर्यादित उपयोग और आतंरिक सलामती के मुद्दे पर.

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