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The constitution of India - part 9

The constitution of India

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सुप्रीम कोर्ट


सन 1935 के भारत सरकार के अधिनियम के तहत संधीय न्यायलय की स्थापना हुई. अनुच्छेद 124 के तहत की जोगवाई. स्थापना - 28 जनवरी 1950 को हुई थी. सुप्रीम कोर्ट संविधान के पेरेंट्स का फर्ज अदा करती है. मुख्य कार्य - संविधान का अर्थघटन और नागरिको के मूलभूत हक का जतन. मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा होती है और अन्य न्यायाधीश की नियुक्ति भी राष्ट्रपति के द्वारा ही होती है. शपथ विधि भी राष्ट्रपति के समक्ष होती है. वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में एक मुख्य न्यायाधीश और 30 अन्य न्यायाधीश है.

न्यायाधीश की लायकात


न्यायाधीश भारत का नागरिक होना चाहिए. उस व्यक्ति को वडी अदालत में 5 साल का तजुर्बा या वडी अदालत में 10 साल का वकील का तजुर्बा होना चाहिए। 65 साल तक कोई व्यक्ति होद्दे पर रह सकता है यातो 6 साल इस मेसे जो भी पहले हो वह. निवृत्ति के बाद वक़िलात नही कर सकते. न्यायादिश को दूर करने के लिए महाभियोग लागू हो सकता है. अभी तक एक बार भी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग लागू नही हुआ है. 1993 में मुख्य न्यायाधीश वी. रामस्वामी के सामने ठहराव किया गया लेकिन शासक पक्ष मतदान से दूर रहते ठहराव पसार नही हो पाया.

कार्य

निरपेक्ष कार्य क्षेत्र - अनुच्छेद 131 के तहत इसका काम विवाद को सॉल्व करना है जैसे कि दो राज्यो के बिचमे विवाद. 2 या उससे ज़्यादा राज्यो के बिचमे विवाद.

अपील का कार्य क्षेत्र

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों को लागू होता है देश का सबसे बड़ा अपील न्यायलय सुप्रीम कोर्ट है.

1 निचे दी गयी किसी भी कोर्ट मे से हाई कोर्ट में अपील

किसि केस में संविधान का अर्थघट्न सामिल हो. दीवानी केस के सम्बन्ध में. फोजदारी केस के सम्बन्ध में जो निचे की अदालत में 7 साल की या उससे ज्यादा कठोर सजा सुनाई हो तो हाई कोर्ट में अपील हो सकती है.

2 सुप्रीम कोर्ट में अपील

अनुच्छेद 136 में जोगवाई. मंजूरी के द्वारा कोई भी केस सीधा सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है और कोई भी अदालत के चुकादे के सामने विरुद्ध अपील हो सकती है. संविधान की बाबत में हाई कोर्ट उनके चुकादे के द्वारा बताते है. इस तरह के केस में संविधानिय अर्थघटन ज़रूरी है और तब सुप्रीम कोर्ट में जाने का अधिकार है. किसी भी प्रकार के दीवानी और फोजदारी केस में. जब कोई निचे की अदालत में आरोपी को निर्दोष करार दिया जाए या हाई कोर्ट में किसी अपराधी को 10 साल या उससे ज्यादा सजा दी जाती है तब सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है.

अपील


किसी भी केस में संविधान का अर्थघटन समाविष्ट हो। दीवानी केस में संबंधित। फौजदारी केस के संबंध मर अगर नीचे की अदालत में 7 साल की कैद या उससे ज़्यादा कठोर सजा कीगई हो तब हाई कोर्ट में अपील का अधिकार मिलता है।

2 सुप्रीम कोर्ट में अपील

अनुच्छेद - 136 में जोगवाई। मंज़ूरी के द्वारा कोई भी केस में सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते है और किसीभी कोर्ट के चुकादे के विरुद्ध अपील हो सकती है। संविधानिय मुद्दे में हाई कोर्ट उसके चुकादे के द्वारा बताती है और इस केस में संविधान का अर्थघटन ज़रूरी है तब आपको सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार मिलता है। केइसीभी तरीके के दीवानी या फौजदारी केस में। किसी भी नीचे की अदालत के द्वारा अपराधी को निर्दोष बताया जाए तब आप सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते है और जब हाई कोर्ट ने 10 साल या उससे ज़्यादा की सज़ा दी हो तब भी आप सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते है।

रिट का कार्य


अनुच्छेद 32 के तहत रिट। अनुच्छेद 139 के तहत सुप्रीम कोर्ट और अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट रिट जारी कर सकते है।

वास्तविक अधिकार क्षेत्र


सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों को लेकर जोगवाई। सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से कोई भी केस सीधे सुप्रीम कोर्ट में लेजा सकते हौ। मूलभूत अधिकारी बाबत में। सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 32 के तहत और हाई कोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत वास्तविक अधिकार क्षेत्र बनता है। महेसूली कर के मुद्दे और कौटुंबिक जगडो के विवाद। वत्स पत के विवाद। सेशन्स कोर्ट के द्वारा दीगयी फाँसी की सज़ा हाईकोर्ट के द्वारा प्रमाणित की जानी चाहिए अब बात करे अपवाद की तो आंतर राज्य जल विवाद सुप्रीम कोर्ट में लेजाया नही जा सकता। अनुच्छेद 262 के तहत आंतरराष्ट्रीय जल विवाद के समाधान करने की सत्ता संसद के पास है।

आंतर राज्य परिषद


अनुच्छेद - 263 के तहत जोगवाई। इसकी रचना राष्ट्रपति के द्वारा होती है। आंतरराष्ट्रीय परिषद का उद्देश्य राज्य और केंद्र के बीच के विवाद का समाधान करना 1990 में सरकार या कमीशन की बिनती से रचना. हर एक राज्य के मुख्यमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री वादाप्रधन के द्वारा 5 केबिनेट मंत्री की नियुक्ति होती है. एक साल में कमसे कम 3 सभा का आयोजन होना चाहिए. यह परिषद् स्थायी परिषद् है.

नजीरी अदालत


अनुच्छेद १२९ के द्वारा हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट को  नजीरी अदालत कहा जाता है. ऐसी अदालत जिसकी सुनवाई को सबूत के तौरपर पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त होती है. नजीरी अदालत ही कोर्ट के अपमान के लिए सजा दे सकती है.

न्यायाधीश को दूर करनेकी प्रक्रिया


यह प्रक्रिया फ़क्त संसद में ही हो सकती है. इसके लिए संसद के किसी भी गृह में प्रस्ताव दिया जा सकता है. इस प्रस्ताव के लिए लोकसभा के 100 और राज्यसभा के 50 सभ्यों का समर्थन होना ज़रूरी है. स्पीकर और चेयरमेन आरोपी की तहतिश करने के लिए एक समिति बनाते है जिस समिति में कुल 3 सभ्य होते है.

1 S.C के मुख्या न्यायाधीश
2 किसीभी H.C के मुख्य न्यायाधीश
3 प्रख्यात कायदा विद

प्रथम गृह में विशेष बहुमति से प्रस्ताव पसार होने के बाद दुसरे गृह में भी विशेष प्रस्ताव पास करना पड़ता है. उसके बाद राष्ट्रपति न्यायाधीश को पद परसे दूर करते है. यह प्रक्रिया हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट या कोई भी अन्य न्यायाधीश को दूर करने के लिए एक जैसी ही होती है.

वडी अदालत


वडी अदालत देश की शीर्ष अदालत है. इसके लिए अनुच्छेद - 214 के तहत जोगवाई है. अनुच्छेद - 231 के तहत संसद कायदे के द्वारा दो या उससे ज्यादा राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशो के बिच एक वडी अदालत की स्थापना कर सकते है. वडी अदालत के न्यायाधीश के लिए अनुच्छेद 217 के तहत जोगवाई है. वडी अदालत के लिए न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति करते है और उनकी सपथ विधि राज्यपाल करते है और न्यायाधीश का इस्तीफा भी राष्ट्रपति ही स्वीकार करते है. न्यायाधीश का कार्यकाल ६२ साल की उम्र तक होता है. वडी अदालत के न्यायाधीश पद के लिए कम से कम 5 साल तक न्यायिक पद को धारण किया हुआ होना चाहिए या 10 साल का वडी सदलत का अनुभव होना चाहिए. भारत में टोटल 24 वडी अदालत है.

ताबा की अदालत


राज्यमे वडी अदालत के ताबा के निचे जिल्ला और शेसन्स कोर्ट होती है. डिस्ट्रिक्ट जज की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा वडी अदालत की सलाह से होती है.

परिवार न्यायलय


राज्य सरकार के द्वारा 10 लाख से ज्यादा वस्ति वाले प्रदेश या जहा सरकार को ठीक लगे वहा परिवार न्यायलय की स्थापना हो सकती है. इसकी स्थापना सन 1984 से हुई है. इस अदालत का मुख्या काम पारिवारिक समस्या का जल्दी उकेल लाना है.

लोक अदालत


स्थापना - 6 अक्टूबर 1985 को हुई थी. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायादिश पि . एम् भगवती की अध्यक्षता में सबसे पहले दिल्ली में आयोजन हुआ था. लोक अदालत की सुनवाई के विरुद्ध किसी भी दूसरी अदालत में अपील नहीं हो सकती है.

ग्राम न्यायलय


संसद के द्वारा 2008 से मंजूरी देदी गयी थी. राज्यसरकार हाई कोर्ट की सलाह से तालुका पंचायत समिति पर एक से ज्यादा ग्राम पंचायत की रचना कर सकते है. मुख्य मथक - तालुका पंचायद का मुख्यालय. सब तरीके के फोजदारी और दीवानी केस का स्वीकार करे जिसमे 2 साल तक की सजा की जोगवाई है. दीवानी न्यायलय की तमाम सत्ता प्राप्त होती है.

मुफ्त कानूनी सहाय


संविधान के भाग - 4 के अनुच्छेद 39(A) के तहत मुफ्त और सामान न्याय की सरलता के लिए यह योजना बनाई गयी है. SC में वार्षिक आमदनी 50000 और HC में वार्षिक आमदनी 25000 होऐसे महिला बालक और विकलांग व्यक्ति को मुफ्त कानूनी सहाय मिलती है.

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