Competitive exam

The constitution of India part - 7

The constitution of India


उपराष्ट्रपति


अनुच्छेद 63 के तहत उपराष्ट्रपति के पद के लिए जोगवाई है। जिसके तहत भारत मे एक व्यक्ति उपराष्ट्रपति पद पर रहेंगे। जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति का कार्य भार संभालेंगे तब उपराष्ट्रपति का कार्य भार राज्यसभा के उपसभापति संभालेंगे किंतु इस वजहसे वह उपराष्ट्रपति नही कहलाएंगे। कोई भी व्यक्ति उपराष्ट्रपति बने और उसके बाद कोई भी कार्य या निर्णय करे और उसके बाद उसका पद बिनकायदेसर गिना जाए तो उसके किये हुए काम को रद नही किया जा सकता। राज्यसभा में निर्यायक मत दे सकते है। राष्ट्रपति के राजीनामे की सूचना लोकसभा के अध्यक्ष को करते है। कोई भी व्यक्ति जितनी बार चाहे उपराष्ट्रपति बन सकता है। राज्यसभा के सभापति के रूप में 4 लाख रुपए की पगार हर महीने मिलती है।

पद पर से दूर करनेकी प्रक्रिया


प्रथम ठहराव राज्यसभा में करना पड़ता है। जिसकी सूचना 14 दिन पहले उपराष्ट्रपति को दी जाती है। इस दरम्यान उपराष्ट्रपति राज्यसभा के नेतृत्व नही करते। राज्यसभा मेसे बहुमति से ठहराव पसार करके लोकसभा का समर्थन लेना पड़ता है।

वडाप्रधान


अनुच्छेद - 74 के अनुसार वडाप्रधान की जोगवाई। अनुच्छेद - 75 के तहत वडाप्रधान की निमणुक राष्ट्रपति के द्वारा होती है और अन्य मंत्री की निमणुक वडाप्रधान के साथ चर्चा विचारना कर के होती है। वडाप्रधान मंत्री मंडल के प्रधान होते है अगर उनकी मृत्यु हो जाए या वह राजीनामा दे दे तो ऐसी स्थिति में मंत्री मंडल का विसर्जन हो जाता है। लोकसभा में अविस्वाश की दरखास्त होते ही मंत्री मंडल को राजीनामा देना पड़ता है। देश के वडाप्रधान को सपथ राष्ट्रपति दिलाते है। और वडाप्रधान को राजीनामा भी राष्ट्रपति को ही देना होता है। वडाप्रधान देश के वास्तविक और राजकीय वड़ा है। राष्ट्रपति को वडाप्रधान की सलाह पर काम करना होता है।

नायाब वडाप्रधान


नायाब वडाप्रधान की संविधान में कोई जोगवाई नही है फिरभी अबतक 7 व्यक्ति की नायाब वडाप्रधान के रूप में निमणुक हो चुकी है। जिसमे सरदार वल्लभभाई पटेल सन 1947-1950, मोरारजी देसाई 1967-1969, जगजीवनराम 1979-1979, जगजीवनराम 1979 - 1979, वाय. वी. चौहान 1979-1980, चौधरी देवीलाल 1989 - 1991, लालकृष्ण अडवाणी 2002-2004

मंत्री परिषद


अनुच्छेद - 75 के तहत राष्ट्रपति मंत्रियों की निमणुक करेंगे। मंत्री परिषद के प्रत्येक सभ्य राष्ट्रपति के समक्ष शपथ लेंगे। मंत्रियोकि सामूहिक जवाबदारी - लोकसभा को। व्यक्तिगत जवाबदारी - राष्ट्रपति को।

मंत्री परिषद में तीन प्रकार के मंत्री है

1 केबिनेट मंत्री
2 राज्यकक्षा मंत्री
3 नायाब मंत्री

1 केबिनेट मंत्री


यह मंत्री दिए गए विभाग के अध्यक्ष होते है। यह मंत्री सबसे महत्व पूर्ण मंत्री है। केबिनेट मंत्री सब प्रकारकी नीति बनाते है। वडाप्रधान और केबिनेट मंत्री मिलके मंत्रिमंडल का निर्माण करते हैं।

2 राज्यकक्षा मंत्री


इसमें दो प्रकार के मंत्री होते

1. जिनके पास स्वतंत्र हवाला होता है. इस प्रकार के मंत्री मंत्रालयों का स्वतंत्र हवाला रखते है. इन के पास केबिनेट जैसे ही सामान सत्ता होती है. और इस प्रकार के मंत्री बिना किसी न्योते के केबिनेट की बैठक में भाग ले सकते है.

2 जिनके पास हवाला नहीं होता. इस प्रकार के मंत्री केबिनेट मंत्री के सहायक होते है. और यह केबिनेट की बैठक में भाग नहीं ले सकते है.

3 नायब मंत्री


इनको स्वतंत्र हवाला नहीं मिलता. यह केबिनेट और राज्य कक्षा के मंत्री के सहायक होते है. राष्ट्रपति किसी भी व्यक्ति को जो संसद सभ्य नहीं है उसे भी मंत्री बना सकते है किन्तु इस प्रकार की व्यक्ति की 6 महीने की मर्यादा में संसद के कोई भी गृह का सभ्य पद लेना पड़ता है. 91 वा सुधार 2003 के तहत मंत्री मंडल की महत्तम संख्या लोकसभा की कुल बैठक के 15% से ज्यादा न हो और इसमें वाडाप्रधान भी शामिल है. मंत्रिमंडल के सभ्यों की संख्या कुल सभ्योके 15 % से ज्यादा नहीं और कम से कम 12 सभ्यों की होती है. वाडाप्रधन मंत्रीमंडल के वडा है और राष्ट्रपति मंत्रिमंडल के बिच कड़ीरूप है. मंत्रिमंडल के सारे निर्णय और शासन संबंधित प्रस्ताव की राष्ट्रपति को जानकारी देते है।

About Mensutrapro

0 comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.