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The constitution of India part - 6

The constitution of India

The constitution of India
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भाग - 5 केंद्र की व्यवस्था


राष्ट्रपति


कलम - 52 राष्ट्रपति पद। कलम - 54 चुनाव - अप्रत्यक्ष तरीकेसे। मतदार - संसद के चुने हुए सभ्य। राज्य की विधान सभा के चुने हुए सभ्य। केंद्रशासित प्रदेश (दिल्ली + पॉन्डिचेरी विधानसभा) के चुने हुए सभ्य (70 वा सुधार 1992)। चुनाव का विवाद - सुप्रीम कोर्ट में लाया जा सकता है। कलम - 60 राष्ट्रपति की सपथ - सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश/ वरिस्थतम न्यायाधीश दिला सकते है। राष्ट्रपति का राजीनामा - उपराष्ट्रपति ही स्वीकार कर सकते है। राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल का होता है। भारत का नागरिक होना चाहिए और वह अस्थिर दिमाग वाला नही होना चाहिए। उम्र 35 वर्ष या उससे ऊपर होनी चाहिए। लाभ के होद्दे पर नही होना चाहिए। यह होददा ब्रिटेन मे से लिया गया है। इसमें 50 सभ्य का समर्थन होना चाहिए।

राष्ट्रपति की सत्ता


1 न्यायिक सत्ता / कायदाकिया सत्ता


राष्ट्रपति देश के संविधान के वड़ा है। देश के सैन्य की तीनों पंखों के वरिष्ठ है। और सारे काम उसके नाम। क (72) के हिसाब से यदि किसी को सज़ा हुई हो तो उस सजा की माफी, सज़ा को कम करना और सज़ा को मौकुफ रखना यह सब राष्ट्रपति कर सकते है। राष्ट्रपति संसद के कायदे के भंग के लिए दी जाने वाली सजा को माफ कर सकते है। अगर किसी को मृत्यु दंड मिला हो तो वह केवल राष्ट्रपति ही माफ कर सकते है। राष्ट्रपति मिलिट्री कोर्ट की सज़ा भी माफ कर सकते है।

सज़ा माफी के पांच प्रकार इस प्रकार है।


विलंब - सम्पूर्ण मुक्ति
क्षमा - रोके रखना
लघुकरण - सजा के स्वरूप में परिवर्तन
परिहार - सजा के समय मे परिवर्तन
विराम - किसी भी खाश कारण से स्वरूप या समय मे परिवर्तन

राष्ट्रपति लोकसभा का विसर्जन कर सकते है। लोकसभा की नए साल की प्रथम बैठक और नई लोकसभा की प्रथम बैठक का सम्बोधन। लोकसभा में (2) एंग्लो इंडियन राज्यसभा में (12) अलग अलग क्षेत्र में निश्नांत व्यक्ति की निमणुक। राष्ट्रपति वडाप्रधान के पास से किसी भी प्रकार की माहिती को मांग सकते है और वडाप्रधान वह माहिती देनेकेलिये बंधा हुआ है। राष्ट्रपति वटहुकम भी जारी कर सकते है। किसीभी राज्य के नाम या क्षेत्र में परिवर्तन करते आर्डर को जारी करनेसे पहले राष्ट्रपति की मंज़ूरी ज़रूरी है।

2 कारोबारी सत्ता


देशके महत्वपूर्ण अधिकारी की निमणुक कर सकते है जिसमे सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायादिश, सर्वोच्च अदालत के अन्य न्यायाधीश। हाईकोर्ट के न्यायाधीश, CAG मुख्य चुनाव अधिकारी, एटर्नी जनर, राज्यपाल, UPSC के अध्यक्ष

3 नाणाकिय सत्ता


नाणा बजट राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी के बिना जारी नही होता। नाणाकिय खारड़ा की राजुआत पहले राष्ट्रपति की मंज़ूरी ज़रूरी है।

4 कटोकटी की सत्ता


यह तीन प्रकार की होती है।

1 राष्ट्रीय कटोकटी (352)

A बाह्य, B आंतरिक

देशमे सुरक्षा का जोखम हो तब और युद्ध जैसी स्थिति हो तब। राज्य सरकार पे अंकुश कर एक चक्री शासन खुदके पास रखते है। 6 महीने का समय - चाहे उतनिबार लागू होगा। मंजूरी - कटोकटी जारी होते ही 30 दिन में दोनों गृह में विशेष बहुमति से पसार करना होगा। केबिनेट की लिखित मंजूरी के बाद ही लगाई जा सकती है। लोकसभा के 10% सभ्यो स्पीकर के सहित राष्ट्रपति को वापिस लेने की नोटिस दे तो 14 दिनों में बैठक बुला के 14 दिनों में रद्द होती है। कटोकटी के समय लोकसभा/विधान सभा का समय 1 वर्ष एक साथ बढ़ाया जा सकता है लेकिन कटोकटी पूर्ण होने के 6 माह में विसर्जन। कलम - 19 रद - 358 के हिसाब से। कलम - 359 के हिसाबसे - 32 रद हो सकती है। अपवाद 20/21 रद न होंगी।

संविधानिय कटोकटी (356/365)

राष्ट्रपति शासन

356 - राज्यसरकार राज्य के ऊपर से उसका अंकुश खोते है तब राज्यपाल राष्ट्रपति को बिनती करते है। 365 - राज्य सरकार केंद्र के आदेश का पालन करने में निस्फड़ होती है तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सजता है। मंजूरी - संसद की 2 महीने में दोनों गृह में सामान्य बहुमति।  समय - एक साथ 6 मॉस और कोई भी स्थिति में ज्यादा से ज्यादा 3 साल। चुनाव पञ्च के मुताबिक चुनाव शक्य न हो तो मुदात बढ़ सकती है।

नाणाकिय कटोकटी (360) के तहत

यह आर्थिक संकट के समय लगे जा सकती है लेकिन यह अभी तक कभी भी नहीं लगी है।  इसका समय सरकार की मर्ज़ी पर होता है जब तक सरकार चाहती है इसे जारी रख सकती है। मंजूरी - 2 महीने में संसद में सामान्य बहुमति से।

राष्ट्रपति के बदले / विकल्प

कार्यकाल की समाप्ति में जा तक नए राष्ट्रपती नहीं आते तब तक पुराने ही रहते है. महाभियोग, राजीनामा, मृत्यु, गेरहाजरी इन कारणों से राष्ट्रपति का पद खाली होता है तो उस पद की जग पर उपराष्ट्रपति पद सँभालते है और अगर उपराष्ट्रपति ना हो तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्या न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश पद संभालते है. जो राष्ट्रपति का पद महाभियोग या राजीनामा या मृत्यु से खाली हो जाए तो 6 महीने के अंदर चुनाव होते है।

महाभियोग 61 के तहत

प्रक्रिया कोई भी गृह मे से शुरू हो गृह की कुल संख्या के 25% सभ्यो का समर्थन  होना चाहिए। गृह प्रस्ताव पास करेगा कुल संख्या के ⅔। दूसरा गृह आरोपो की जांच करे वहा राष्ट्रपति खुदकी बात रख सकते है। दूसरे ग्रह के द्वारा प्रस्ताव ⅔ विशेष बहुमति से पसार करना पड़ेगा। सिर्फ संसद के चुने हुए और निमणुक प्राप्त सभी सभ्य हिस्सा ले सकते है। विधान सभा सभ्य भाग नही ले सकते।

वीटो पावर की सत्ता


वीटो पकवेर के तीन प्रकार है

1. निलंबन कारी (फ्रांस)
2. आत्यंतिक वीटो
3. पॉकेट वीटो (अमेरिका)

1 निलंबन कारी

राष्ट्रपति जब अर्ज़ी को पुनः विचारना के लिए परत भेजे तब इस को वीटा का उपयोग कहते है।

2 अत्यान्तिक वीटो

किसीभी खानगी सभ्य की अर्जी में सरकार की सलाह अनुसार वर्तन। जिस भी सरकार का कार्यकाल पूरा हो गया हो ऐसी सरकार के द्वारा बनाई गई अर्जी को राष्ट्रपति विवेक शक्ति के आधार पर नई सरकार नही आ जाती तब तक पैंडिंग रख सकते है।

3 पॉकेट वीटो

किसी भी अर्जी पर अनिश्चित काल के दरम्यान निर्णय ना लेनेकी सत्ता को पॉकेट वीटो कहते है। इसके कारण से राष्ट्रपति पे महाभियोग नही हो सकता।

4 वटहुकम / हंगामी कायदा - 223

जब भी शून्य अवकाश परिस्थिति हो तब वडाप्रधान की सलाह पर। समय 6 महीने तक। इसकी मंजूरी गृह की बैठक मिलने पर ज़्यादा से ज़्यादा 6 सप्ताह तक।

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