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The constitution of India part - 5

The constitution of India

The constitution of India
The constitution of India

संविधान में समाविष्ट विशेष माहिती


भाग - 1 संघ और उसका कार्य क्षेत्र

अनुच्छेद 1 से 4

अनुच्छेद - 1 संघ का नाम और प्रदेश

A) भारत का राज्य क्षेत्र विस्तार
1 राज्य, 2 दिल्ली ntc सहीत के केंद्रशाषित प्रदेश 3, अब जो भी विस्तार को प्राप्त किया जाएगा उसको राज्यक्षेत्र से बनाहुआ माना जाएगा।

अनुच्छेद - 2 संसद को भारत की सीमा के बाहर नए राज्य का प्रदेश के स्थापना की सत्ता।

अनुच्छेद - 3 संसद को भारत के वर्तमान राज्य मे से नए राज्य की रचना एवं वर्तमान राज्यों के नाम, सिमा, क्षेत्रो में परिवर्तन करने की सत्ता।

अनुच्छेद - 4 यदि अनुच्छेद 2 या 3 में कोई बदलाव होता है तो परिशिष्ट 1 और 1 में भी बदलाव होंगे।

भाग 2 नागरिकता


अनुच्छेद 5 to 11

26 नवंबर 1949 से पहले नागरिकता के लिए कोई भी नियम नही थे। अनुच्छेद 5 से 11 में नागरिकता से संबंधित कायदे लागू किये गए है।

कलम - 5

संविधान के हिसाब से जो भी व्यक्ति भारत मे हो और जिसका जन्म भारतीय प्रदेश में हुआ हो। माँ-बाप मे से किसी का जन्म भारत मे हुआ हो। और संविधान के अमल के पहले 5 साल से भारत मे रहते हो।

यह कलम संविधान के प्रारंभ में अधिबास से नागरिकता की प्राप्ति की जोगवाई है। लेकिन उसके बाद जन्मे हुए इस अनुच्छेद के हिसाब से भारतीय नागरिक नही बनते। उस मुद्दे पर भारतीय नागरिकता धारा 1955 अमल में आएगा।

समग्र भारत के लिए एक नागरिकत्व

नागरिकत्व धारा -1995

इस धारा के तहत 5 तरीके से भारतीय नागरिकता प्राप्त होती है।

1 जन्म के द्वारा
2 वंशानुक्रम के द्वारा
3 नोंध के द्वारा
4 देशीयकरण के द्वारा
5 प्रदेश में शामिल होने से

1 - जन्म

 26-1-1950 के रोज़ और उसके बाद जन्मे हुए हर एक व्यक्ति जन्म के द्वारा भारतीय नागरिक माना जाएगा। इस में बहुत से अपवाद भी है जैसे कि विदेश के राजकीय कर्मचारीओ के भारत मे जन्मे बच्चे। जन्म के समय उसके पिता विदेश में रहते शत्रु हो और इसी जगह पर जन्म हुआ हो के वह उस समय शत्रु के कब्जेमें हो। 1985 में यह तय हुआ कि भारत मे जन्मे व्यक्ति की माता या पिता मेसे कोई एक भारत के नागरिक होने चाहिए।

2 - वंशानुक्रम

26-01-1950 के रोज़ और उसके बर्फ भारत के बाहर जन्मे हुए व्यक्ति के पिता उसके जन्म के समय भारतीय नागरिक हो तो उस व्यक्ति के जन्म समय वह भारतीय नागरिक होगा।

3 - नोंध

जो नागरिक नाहो वह नोंध करवा के भारत का नागरिक बन सकता है। उसके लिए नीचे दी हुई शर्त लागू होगी।

व्यक्ति पिछले 5 साल से भारत मे रहता होना चाहिए (1985)। मूल भारत के व्यक्ति है और भारत के बाहर कोई देश मे या जगह पर सामान्य तरीके से रहता हो। जो भारत के पुरुष के साथ शादी करे वह स्त्री। भारतीय नागरिक के सगीर बच्चे

4 - देशियकरण

जो ऊपर दी गयी किसी भी श्रेणी में नही आते वह लोग देशियकरण के उपयोग से भारत का नागरिक बन सकता है। पहले हिन्दू पुख्त वय की व्यक्ति अरजी कर सकती है लेकिन उसके लिए भी कुछ शर्त है जैसे कि वह व्यक्ति किसी ऐसे देश की नही होनी चाहिए जो भारतीयों को अपने राष्ट्र में नागरिकता बनने की सुविधा प्रदान ना करते हो। उसने उसके देश की नागरिकता का त्याग किया हुआ होना चाहिए। अरजी की तारीख से एक दिन पहले से भारत मे होना चाहिए यातो नौकरी में कार्यरत होना चाहिए। और यह एक साल के दरम्यान उसके बाद के सात साल में काम से कम चार वर्ष भारत मे होना चाहिए। चरित्र अच्छा होना चाहिए। संविधान से आधारित 22 भाषाओकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। देशियकरण का प्रमाण पत्र मिलने के बाद भारत मे रहने के लिए नौकरी करने के लिए यातो कोई भी संस्था या समुदाय के नीचे नौकरी करने का इरादा होना चाहिए। उस व्यक्ति को सपथ लेना पड़ेगा की संविधान के प्रति सत्यनिष्ठा से कायदाकिया प्रक्रिया के अनुसार सपथ लेगा। वह भारतीय कायदे का निष्ठा पूर्वक पालन करेगा और भारतीय नागरिक के जो भी कर्तव्य है उसका पालन करेगा। 

5 - प्रदेश का समावेश होनेसे

जो भी प्रदेश भारत का भान बनेगा तो इस प्रकार समाविष्ट होने की वजह से कौन भारतीय नागरिक बनेगा उस बात पर सरकार जाहेरात की मदद से निर्देशित करेगी।

नागरिकता की समाप्ति

अगर कोई भी नागरिकता की समाप्ति करना चाहता है तो इसके तीन तरीके है।

1. त्याग करके

जो कोई दूसरे देश में बसता है और कायदाकिय अरजीपत्र के द्वारा भारतीय नागरिकता का त्याग करेगा तो उस अरजीपत्र की नोंध के बाद वह नागरिकता खो देगा।

2. समाप्ति करने के द्वारा

कोई दूसरे देश की नागरिकता अपनी मर्ज़ीसे से स्वीकारी गयी हो तो उसी समय भारतीय नागरिकता खत्म हो जाएगी।

3. वंचित करने पर

जिसने देशियकरण और नोंध के द्वारा नागरिकता प्राप्त की हो ऐसे लोगो नागरिकता से वंचित हो सकते है। नागरिकता को प्राप्त करनेमे जालसाज़ी की हो। भारतीय संविधान प्राप्त कार्य यातो वाणी के द्वारा अनास्था दिखाई हो। भारत के साथ युद्ध करने वाले राष्ट्र की मदद की हो। भारतीय नागरिकता को स्वीकार करनेके पांच साल के समय दरम्यान कोई भी अन्य देश मे 2 साल यातो उससे ज़्यादा कारावास का दंड मिला हो यातो 7 साल तक इन्फॉर्म किया बिना बाहर निवास किया हो।

अनुछेद 5 से 11 की जोगवाई

अनु-5 संविधान के प्रारंभ में जिस व्यक्ति का अधिवास भारत में हो वह भारत का नागरिक माना जाएगा।

अनु-6 संविधान के शुरुआत से पहले पाकिस्तान से वापिस आये हुए कुछ व्यक्ति को नागरिकता का अधिकार 19 जुलाई 1948 से पहले।

अनु-7 1 मार्च 1947 के बाद भारत मे से वर्तमान पाकिस्तान में समाविष्ट प्रदेश में स्थडांतर किया होगा तो वह भारत का नागरिक नही रहेगा।

अनु-8 विदेश में रहते मूल भारतीयों को नागरिकत्व का अधिकार (माता-पिता, दादा-दादी 1935 भारत की व्याख्या के अनुसार भारत मे जन्म हुआ होना चाहिए।

अनु-9 कोई व्यक्ति अपनी मर्ज़ी से दूसरे देश का नागरिकत्व स्वीकार करता है तो वह भारतीय नागरिक नही रहता।

अनु-10 ऊपर दिए संजोग के मुताबिक भारतीय नागरिक हो कि जिसको भारतीय नागरिक माना गया हो वह नागरिक भारत का नागरिक माना जाएगा।

अनु-11 संसद को नागरिकत्व की प्राप्ति और अंत के बारे मे कायदा बनाने की सत्ता दी गयी है।

भाग - 3 मूलभूत अधिकार कलम 12 से 35


व्यक्ति के जीवन और विकास के लिए मूलभूत और अनिवार्य अधिकार को मूलभूत अधिकार कहते है। (भौतिक, मानसिक, आर्थिक, नैतिक - विकास)

अधिकारों का पालन राज्य के लिए अपनाया गया इसका मतलब अगर यह अधिकार नागरिक को न मिले तो कोई भी व्यक्ति न्यायतंत्र से न्याय मांग सकते है।

मूलभूत अधिकार का इतिहास

भारत मे मौलिक अधिकार की प्रथम मांग संविधान अधिनियम - 1895 के माद्यम से की गई थी। सन 1945 म सर तेज बहादुर सप्रू समिति ने भी मूलभूत अधिकार की विनंती की। अमेरिका के संविधान से प्रभावित। इंसान की मूलभूत जरूरियात यानी रोटी, कपड़ा और मकान उसको सन्मान पूर्वक मिले उस हेतु से दूसरे विश्वयुद्ध बाद युनॉ की महासभा ने 10 दिसंबर 1948 के दिन मानव अधिकार लागू हुआ। उसकी संख्या 30 थी। जिसमे से कुछ अधिकार अपने संविधान में राखेगये। संविधान के भाग - 3 को भारत का मैग्नाकार्टा कहा जाता है जोकि इंग्लैंड के एक शहर है। मूलभूत अधिकार को विश्व मे सबसे पहले फ्रांस ने 1789 में खुदके संविधान में स्थान दिया। सन 1215 में इंग्लैंड के मैग्नाकार्टा में मूलभूत अधिकार के बारे मे विचार किया गया था। आज़ादी के बाद मूलभूत अधिकार के लिए सलाहकारी समिति की रचना की गई और इस समिति के अध्यक्ष सरदार पटेल थे।

मुख्य 6 तरीके के अधिकार

समानता का अधिकार (14 से 18)
स्वतंत्र का अधिकार (19 से 22)
शोषण के खिलाफ का अधिकार (23 से 24)
धार्मिक स्वतंत्र का अधिकार (25 से 28)
सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार (29 और 30)
संविधान उपचार का अधिकार (32)

संविधान की शुरुआत में अधिकार की संख्या 7 थी लेकिन 1978 में 44 वे सुधार के तहत संपत्ति के मूलभूत अधिकार को समाप्त करके उसे कायदाकिय अधिकार में स्थान दिया गया।

समानता का अधिकार (कलम 14 से 18)

अनुच्छेद 14 - कायदे के समक्ष समानता

एक जैसे संजोग में आई हुई व्यक्ति या मुद्दे के साथ कायदे जा एक जैसा ही व्यवहार किया जाता है और सबके लिए समान कायदा है। ब्रिटेन के संविधान मेसे कायदे के समक्ष समानता ली गई है। अमेरिका मेसे कायदे का समान रक्षण लिया गया है। राष्ट्रपति और राज्यपाल को 361 के द्वारा विशेष अधिकार है। संसद सभ्य को 105 तथा विधान सभा के सभ्य को 194 के द्वारा विशेष अधिकार प्राप्त है।

अनुच्छेद - 15 धर्म, जाती, लिंग, और जन्म स्थान के कारण भेदभाव पर प्रतिबंध।

राज्य कोई भी नागरिक के साथ मात्र धर्म, जाती, लिंग, जन्म जैसे किसी भी कारण से भेदभाव नही करेंगे।

अनुच्छेद - 16 जाहेर नौकरी के मुद्दे में तक कि समानता

राज्य में कोई भी निमणुक या होद्दे के संबंध में कोई भी नागरिक मात्र जाती, लिंग, कुल, या जन्म स्थान और निवास मे से कोई भी कारण सर उस पद के लिए अयोग्य नही बनेगा ऐसा भेदभाव नही चलेगा।

अनुच्छेद - 17 अस्पृश्यता की नाबूदी

संसद ने 1995 में अस्पृश्यता का कायदा बनाया. अस्पृश्यता को नाबूद किया जाता है और उसका आचरण किसीभी स्वरुप में प्रतिबंधित है और अस्पृश्यता मेसे उत्पन्न हुई किसी भी प्रकार की अयोग्यता का अमल कायदेके अनुसार गुनाह है. 

अनुच्छेद - 18 इल्काबो की नाबूदी/ उपाधि की नाबूदी

राजा महाराजा सामंतो. लश्करी या शैक्षणिक संभंधित इल्काब के सिवा कोई इल्काब राज्य नहीं दे सकता. असामान्य कार्य करते है उसे अलग अलग खिताब दिए जाएँगे. राष्ट्रपति की अनुमति के बगेर खिताब नहीं मिलेगा.

2. स्वतंत्रता का अधिकार (19 से 22)

अनुच्छेद - 19 वाणी स्वतंत्र और रक्षण

नागरिको को 6 तरीके की स्वतंत्रता दी गई है. मूल बंधारण में 7 थी. सन 1978 में 44 वे सुधार से मिलकत स्वातंत्र्य का मूलभूत अधिकार  रद्द किया गया।

वाणी स्वातंत्र्य
शांति से और बगैर शास्त्रो से मिलना
मंडल या संघ की रचना यातो सहकारी मंडली की रचना (97 वा सुधार 2011)
कोई भी प्रदेश में घूमने की स्वतंत्रता
व्यवसाय, कामकाज, व्यापार, और धंधे की स्वतंत्रता

अनुच्छेद - 20 गुना के लिए दोष। सिद्धि संबंध में रक्षण

किसी भी व्यक्ति के द्वारा की गई आत्महत्या के लिए सिर्फ 1 बार सज़ा होगी। आत्महत्या के समय प्रवर्तमान कायदे के हिसाब से सजा।

अनुच्छेद - 21 जीवन और शारीरिक स्वातंत्र्य का रक्षण

कायदे के अधिकार से किसी भी व्यक्ति का जीवन और स्वातंत्र्य चीनी नही जा सकती। कटोकटी के समय अनुच्छेद - 20 और 21 समाप्त नही होते ( 44 वा सुधार 1978)

अनुच्छेद - 21 (A) 6 से 14 बरस के बच्चो के लिए मुफ्त और compulsary शिक्षण की जोगवाई राज्य द्वारा की गई। ( 86 वा सुधार - 2002)

अनुच्छेद - 22 धरपकड़ जे सामने रक्षण

धरपकड़ का कारण बताना। धरपकड़ करने के 24 घंटे के अंदर आरोपी को न्यायाधीश के सामने लाया जाएगा। आरोपिको अपनी पसंद का वकील रखने की आज़ादी है।

3. शोषण विरुद्ध का अधिकार (23 और 24)

अनुच्छेद - 23 मनुष्य व्यापार पे प्रतिबंध/ और ज़बरदस्ती पे प्रतिबंध। इस के विरुद्ध कार्य करने वाले शिक्षा पात्र है।

अनुच्छेद - 24 बाल मजदूरी पर प्रतिबंध

14 बरस से कम के बच्चो को कारखाने और खिन में काम पे नहीं रख सकते। 12 जून को विश्व बाल मजदूरी विरोधी दिन मनाया जाता है।

4. धार्मिक स्वातंत्र्य का अधिकार (25 से 28)

अनुच्छेद - 25 अंतकरण पूर्वक मुक्त तरीकेसे धर्म की मान्यता पालन और प्रचार का स्वातंत्र्य।

अनुच्छेद - 26 धार्मिक बाबतों का वहीवट करनेका स्वातंत्र्य

धार्मिक संस्था के स्थापना का अधिकार। धर्म के मुद्दे पर उसके कार्य का वहीवट करना। जंगम और स्थावर मिलकत की मालिकी प्राप्त करने का और कायदा के हिसाबसे ऐसी मिलकत का वहीवट करनेका अधिकार।

अनुच्छेद - 27 चोक्कस धर्म की अभिवृति के लिए कर की स्वतंत्रता

धर्म की उन्नति के लिए कर संबंधी रक्षण। कोई भी धर्म या धार्मिक संप्रदाय की अभिवृति के लिए कोई भी व्यक्ति से ज़बरदस्ती कर नही लिया जा सकता।

अनुच्छेद - 28 चोक्कस शैक्षणिक संस्थाओमे धकर्मिक शिक्षण की उपसभा में हाजरी की स्वतंत्रता।


सरकार के द्वारा चलाई जाने वाली संस्था में धार्मिक शिक्षा नही दिजासकती। किसी व्यक्ति को रोका भी नही जा सकता।

5. सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार (29 से 230)

अनुच्छेद - 29 लघुमती के हित का रक्षण

राज्य के द्वारा चलाई जारही या राज्यनिधि मे से सहायता लेती कोई भी शैक्षणिक संस्था सिर्फ धर्म, जाती, भाषा के कारण सर किसीभी नागरिक को प्रवेश देने में इनकार नही कर सकती।

अनुच्छेद - 30

लघुमतीओ को शैक्षणिक संस्था की स्थापना और वहीवट करने का अधिकार

अनुच्छेद - 31 मोरारजी देसाई के समय जनता सरकार ने 44 वा सुधार के द्वारा 1978 में मिलकत का मूलभूत अधिकार नाबूद करके भाग - 12 k 300 - A अंतर्गत संविधान के अधिकार बनाए।

6. संविधानिय इलाज का अधिकार

अनुच्छेद - 32 संविधानिय इलाज का अधिकार

इस अधिकार को बाबासाहेब संविधान की आत्मा कहते है। ऊपर दिए गए 5 मूलभूत अधिकार के भंग के बदले सुप्रीम कोर्ट के पास से रक्षण लिया जा सकता है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में 5 तरीके कि रीत दाखिल की गई है।

1.बंदी प्रत्यक्षीकरण - habeas corpus

हैबियस कोर्पस एक लेटिन शब्द है जिसका अर्थ to have the body to conswer। किसी भी व्यक्ति को गैर कानूनी बंदी बनाया गया हो तब। उस व्यक्ति या उसके किसी सगे या मित्र आज्ञापत्र के फरमान के लिए अर्जी कर सकेंगे। अगर न्यायतंत्र को यह लगेगा कि किसी व्यक्ति को गैरकानूनी ढंग से बन्दी बनाया गया है तो यह रीत जारी होती है जिसमे व्यक्ति को निश्चित स्थल पे हाजर करने का आदेश बंदी बनानेवाले को दिया जाता है। इसके लिए पहले highcourt में अर्जी होती है बाद मे सर्वोच्च अदालत में अर्जी होती है।

2. परमादेश - mandamus

मेन्डेमस एक लेटिन शब्द है जिसका अर्थ we command mandamus अर्थात जोभी करने का आदेश (हम आज्ञा देते है). किसी भी पदाधिकारी को उसका फ़र्ज़ पूरा करने के लिए आदेश दिया जाता है। सिर्फ जाहेर पदाधिकारी और कर्मचारी ओ को ही जारी कर सकते है। खानगी संस्था या व्यक्ति राष्ट्रपति राज्य के गवर्नर की अदालत के मुख्य न्यायाधीश को जारी किया नही जा सकता। इसमें वडी अदालत के सर्वोच्च अदालत की तरफ से व्यक्ति निगम या न्याय की कम दर्जे वाली अदालत को उद्देशित करके उसमें निदष्टि किया गया कोई कार्य करने की फर्ज देती आज्ञा है।

3. प्रतिषेध - prohibition

To forbid इसका मतलब ऐसा न करने के लिए। यह आज्ञा पत्र सर्वोच्च न्यायालय और वडी अदालत के द्वारा निम्न अदालत या अर्ध न्यायिक सत्ता ओ को जारी करके आदेश दिए जाते है कि वह उस मुद्दे पे कार्यवाही न करे क्योकि वह उसके अधिकार क्षेत्र में नही है। प्रतिषेधमे नीचे की अदालत को उसके हुकूमत की मर्यादा में रहनेके लिए उच्च अदालत की और से फरमान दिए जाते है।

4. उत्प्रेक्षण - certiorari

उत का मतलब होता है ऊपर और प्रेषण का मतलब होता है भेजने की क्रिया। ऊपरी अदालत के द्वारा उनकी निम्न अदालत को केस निर्णय के लिए ऊपरी अदालत को भेजने का फरमान जारी किया है।

5. अधिकार पुरछा - quo - warranto

जब कोई पदाधिकारी उसके वैधानिक अधिकार के बिना कार्य करता है तब न्यायालय आदेश दे शक्ति है कि वह किस अधिकार से कार्य कर रहा है और जब तक वह सन्तोषकारक जवाब नही दे देता तब तक वह वो कार्य नही कर सकता।

नोंध

अनुच्छेद 20 और 21 के अलावा बाकी के अधिकार राष्ट्रीय कटोकटी के समय स्थगित रख सकते है।

अनुच्छेद 19 युद्ध के बाह्य आक्रमण के समय की कटोकटी के समय स्थगित रख सकते है।

अनुच्छेद 15,16,19,29,30 विदेशी नागरिक को प्राप्त नही होते

अनुच्छेद 22 का अधिकार विदेशिसत्रु को देश के नागरिक को नही मिल सकते

भाग - 3 में समाविष्ट न हुए हो ऐसे अधिकार

भाग - 12 265 - कर के लिए अधिनियम बनाने ज़रूरी है

भाग - 13 300(A) संपति का अधिकार 301 भारत मे व्यापार और वाणिज्य का अधिकार।

भाग - 15 325 पुख्तवय में मतदान यदि में नाम डालने का अधिकार और 326 पुख्तव्य में मताधिकार।

भाग - 4 राज्यनीति के मार्गदर्शक सिद्धांत

तेज बहादुर सप्रू समिति के द्वारा इसकी बिन्ती की गई। और इसका स्त्रोत आयरलेंड है। इसमें अनुच्छेद 36 से लेके अनुच्छेद 51 तक है.

37 राज्य का नैतिक फ़र्ज़ है जिसके पालन के लिए उसको न्यायतंत्र में नही लाया जा सकता।

38 लोक कल्याण में वृद्धि हो ऐसी सामाजिक व्यवस्था का राज्य सर्जन करेगा।

39 राज्य अनुसरण के कुछ सिद्धांत में स्त्री - पुरुष सारे नागरिको की आमदनी के लिए सारे साधनों की व्यवस्था करेंगे और इसमें समान काम के लिए समान वेतन भी शामिल है।

39(A) समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहाय

40 ग्राम पंचायत की स्थापना

41 रोजगार शिक्षण और जाहेर सहाय लेनेका हक

42 काम से संबंधित न्यायी और इच्छीत परिस्थिति और प्रसूति की सहायता

43 कामदार के निर्वाह के लिए ज़रूरी वेतन काम का समय छुट्टी और मज़दूरी की जोगवाई

43(A) उद्द्योग के वहीवट में कामदारी यो की भागीदारी

43(B) सहकारी प्रवृति को प्रोत्साहन

44 एक समान सिविल कॉड नागरिक धारा

45 6 साल से छोटे बच्चो को मुफ्त शिक्षण (राज्य सरकार)

46 SC, ST, OBC वगेरा की आर्थिक और शैक्षणिक हित की अभिवृति राज्य करेगा।

47 पोषण स्तर, जीवनधोरण, जाहेर आरोग्य की बाबत में राज्य का कर्तव्य (दारुबन्दी की जोगवाई)

48 खेती और पशुपालन का वैज्ञानिक तौरपर विकास (गौ हत्या पर प्रतिबंध)

48(A) पर्यावरण की रक्षा और जंगल तथा पशु पक्षी की रक्षा ले लिए अभ्यारण्य तथा नेशनलपार्क एवं जैव आरक्षण क्षेत्र की स्थापना की जोगवाई।

49 राष्ट्रीय स्मारक और स्थड एवं वस्तु का रक्षण।

50 कारोबारी से न्यायतंत्र को अलग रखना।

51 आंतरराष्ट्रीय शान्ति और सलामती

भाग - 4(A) मूलभूत फ़र्ज़


51(क) संविधान के शुरुआत में कोई भी शर्त न थी।

समावेश :

42 वा सुधार 1976 (सरदार). रनसिंह समिति के कहनेसे 10 फ़र्ज़ को बनाया गया. संविधान में फ़र्ज़ रशिया मेसे ली गयी है. सब मिलाकर 11 फ़र्ज़ होती है जो की निचे दी गयी है।

मुलभुत फ़र्ज़

1 संविधान के प्रति वफादार रहनेकी तथा उसके आदर्श और संस्था, राष्ट्रद्वाज और राष्ट्र गीत का आदर करनेकी।

2  आज़ादी के लिए अपनी राष्ट्रीय लड़त को प्रेरणा देते उमदा आदर्शों को हदय में प्रतिष्टित करने की और अनुसरण करने की।

3 भारत मे सार्वभौमत्व, एकता और अखण्डितता का समर्थन करनेकी और उसका रक्षण करनेकी।

4 देश का रक्षण करनेकी और ज़रूरत पडनेपर राष्ट्रीय सेवा करनेकी।

5 धार्मिक, भाषाकीय प्रादेशिक और साम्प्रदायिक भेद से पर रहकर भारत के तमाम लोगो मे सुमेल और समान बंधुत्व की भावना की वृद्धि करने की और स्त्रियोंके गौरव को अपमानित करे ऐसे व्यवहार को छोड़ देनेकी।

6 अपनी समन्वित संस्कृति की समृद्ध जागीर का मूल्य समज ते हुए उसकी रक्षा करनेकी।

7 जंगल, जिल, नदी और वन्य पशु पक्षियों के साथ कुदरती पर्यावरण का जतन करने की और जीव के प्रति अनुकंपा रखने की।

8 वैज्ञानिक मानस, मानवता वाद जिज्ञासा और सुधारणा की भावना को रखनेकी।

9 जाहेर मिलकत का रक्षण करनेकी और हिंसा का त्याग करनेकी।

10 राष्ट्र पुरुषार्थ और सिद्धि को ज़्यादा से ज़्यादा उन्नत सोपान को पढ़के सतत प्रगति करते रहे उसके लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रवृति के तमाम क्षेत्र मे श्रेष्ठता हासिल करने का प्रयास करने की।

11 माता पिता को 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के खुदके बच्चो को शिक्षा का मौका प्रदान करना है।

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